ऊष्मागतिकी तथा ऊष्मागतिकी के नियम तथा प्रकाश का परावर्तन तथा अपवर्तन के बारे में जाने।

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम।

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम मुख्यता ऊर्जा संरक्षण को प्रदर्शित करता है इस नियम के अनुसार इसी निकाय को दी जाने वाली उसमें दो प्रकार के कार्य में ब्याह होती है एक निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि करने में जिससे निकाय का का बढ़ता है और भाई यह कार्य करने में जब किसी निकाय में कोई परिवर्तन स्वीकार हो कि निकाय का ताप पूरी कृपया में स्तर रहे तो उस परिवर्तन को समतापी परिवर्तन कहते हैं यदि किसी निकाय में कोई परिवर्तन इस प्रकार हो की पूरी प्रक्रिया के दौरान निकालना तो भारी माध्यम की ओर जाते और ना ही उससे कोई उस्मा ले तो इस परिवर्तन को रूद्र दोष परिवर्तन कहते हैं कार्बन डाइऑक्साइड का अचानक पृसार होने पर वह शुष्क बर्फ के रूप में बदल जाता है यह रू दोष परिवर्तन का उदाहरण है।

प्रकाश का परावर्तन क्या होता है।

जब कोई प्रकाश किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती हैं तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती हैं तो यह विचलित होने की प्रक्रिया प्रकाश का परावर्तन चलाती है जिस प्रकार कोई भी प्रकाश किरण एक सीधे माध्यम में जाती है तथा दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है तो यह विचलित होने की प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।

  1. अपतन कोण सदैव पराबर्तन कोण के बराबर होता है।
  2. अपतित किरण तथा परावर्तित किरण,अयतन बिन्दु पर अभिलम्ब होता है।

प्रकाश का अपवर्तन क्या होता है।

जब कोई प्रकाश किरण किसी चिकनी प्लस से टकराती है तो वह बापूजी से माध्यम में लौट आती है तो यह है लौटाने की प्रक्रिया प्रकाश का अब बर्तन चलाता है जब कोई प्रकाश किरण एक सीधे माध्यम में जाती है तो जैसे पानी शीशा आदि में टकराती है तो प्रकाश जल में वापस लौटती है तो यह है लौटने की प्रक्रिया प्रकाश का अब बर्तन कहलाता है।

  1. अपतन कोण सदैव पराबर्तन कोण के बराबर होता है।
  2. अपअतीत किरण तथा परावर्तित किरण अयतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होती हैं।

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